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क्यों 2019 में मोदी के सामने कोई दूसरा नेता नजर नहीं आता..??

अभी कुछ ही दिन पहले पीएम मोदी ने एक न्यूज चैनल को साक्षात्कार देते हुए कहा था, “2019 के लोकसभा चुनाव में तो मेरे सामने कोई नहीं है 2024 में देखा जाएगा “. दरअसल वे तमाम संगठन जो स्वंतंत्र रूप से काम कर रहे हैं, सर्वे कर रहे हैं सब के सब यही बात स्वीकार कर रहे हैं कि मोदी सरकार 2019 में 300 से ज्यादा सीट लाएगी. चुनावी बिगुल बज चुका है. सभी पार्टियां अपनी-अपनी तैयारियों में लगी हुई हैं.लोकतंत्र के इस महापर्व की शुरूआत 11 अप्रैल से होगी लेकिन राजनीतिक पार्टियां अभी से ही सत्ता पाने की रेस में शामिल हो गई हैं। अपने पूरे कार्यकाल में जिस तरह से पीएम मोदी ने गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए काम किया है इस वजह से कई विपक्षी दल तो पहले ही रेस से बाहर हो चुके हैं। पीएम मोदी के द्वारा किये गये अबतक के कार्यों और हाल ही में देश की राजनीतिक परिस्थितियों में आए 5 बदलाव के आधार पर कहा जा सकता है कि फिलहाल मोदी के सामने कोई भी नहीं दिखता।

  1. कांग्रेस में प्रियंका गांधी की एंट्री से फायदा नहीं: कांग्रेस में जिस दिन प्रियंका गांधी को महासचिव बनाया गया उसी दिन कांग्रेस भाजपा से चार पायदान पीछे चली गई. प्रियंका का आगमन इस दावे को साबित करता है कि राहुल गांधी से अब कुछ ना हो पाएगा. वैसे अतीत में भी राहुल गांधी ने कोई खास काम नहीं किया है जिसकी चर्चा यहाँ की जाए. प्रियंका गांधी का आगमन इस बात का संकेत देता है कि पीएम मोदी बीते दिनों में काफी मजबूत हुए हैं। इसका असर कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर भी पड़ेगा पहले वे राहुल के पीछे भागते थे, उससे पहले सोनिया के और अब उन्हें प्रियंका के पीछे भागना पड़ेगा. भारत की जनता पिछले साठ सालों से कांग्रेस के वंशवाद को झेल रही है लेकिन अब इसे झेलना मुश्किल है।
  2. क्षेत्रीय नेताओं की पीएम पद पर दावेदारी:  क्षेत्रीय दल के हर नेता को यहाँ पीएम बनना है जबकि पीएम की वैकेंसी एक ही है. फिर भी ये सभी हर दो महीने में बड़े मंच पर प्रकट होते हैं. अभी तक ये अपनी सीट तय करने में लगे हैं. कभी मायावती-अखिलेश के गठबंधन से मुलायम की नाराजगी सामने आती है तो कभी राजद का खुद का कुनबा ही बिखरा नजर आता है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि तेजप्रताप अपने ससुर के खिलाफ मैदान में उतरेंगे.परिवार से तो पहले ही खटपट थी, राजद के संरक्षक के पद से इस्तीफा भी दे दिया है. मान लीजिए इन्हें पूर्ण बहुमत मिल भी जाए तो इनका नेता कौन होगा? प्रधानमंत्री का एक चेहरा होता है लेकिन इनका हर चेहरा ही प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देख रहा है.
  3. पीएम मोदी की नीति  और नेतृत्व: सबसे खास बात यह रही है कि पीएम मोदी का कोई भी मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं पाया गया है जबकि कांग्रेस में केंद्रीय मंत्रियों का भ्रष्टाचारी होना आम था। जनधन योजना,जीएसटी,उज्जवला योजना,डिजिटाइजेशन, मुद्रा योजना, उड़ान,स्व्चछ भारत अभियान ये सारी ऐसी योजनाएं हैं जिनके द्वारा देश का कायाकल्प हुआ है. देश ही नही विदेश में भी मोदी की इन योजनाओं की चर्चा हो रही है. इसके अलावे तीन तलाक खत्म कर मुस्लिम औरतों को एक नई जिंदगी दी है मोदी सरकार ने, ये मुस्लिम महिलाएं हर हाल में 2019 में मोदी को ही देखना चाहेंगे।
  4. विपक्षी एकता रैली में राहुल गांधी का नदारद होना: देश में कुछ लोग हैं जो राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं हालांकि इनकी संख्या उतनी ही है जितनी में पार्षद का चुनाव जीता जाता है. क्षेत्रीय दलों के द्वारा आयोजित रैली में राहुल गांधी का ना जाना इस बात को दिखाता है कि उनके मन में प्रधानमंत्री बनने के सपने मरे नहीं हैं. आजतक,सीवोटर, सीएनन,एबीपी सहित अन्य  किसी भी सर्वे में कांग्रेस को 100 से ज्यादा सीट नहीं मिल पा रही है और क्षेत्रीय दलों के साथ उनका गठबंधन हो नहीं पा रहा है। यूपी में सपा-बसपा ने इनको पहले ही गठबंधन से बेदखल कर दिया. ममता बनर्जी खुद प्रधानमंत्री बनना चाहती हैं, चंद्रा बाबू नायडू ने भी पीएम बनने के लिए कमर कस ली है. ऐसे में गठबंधन से भी पीएम नहीं बनने वाले हैं राहुल गांधी.
  5. नरेन्द्र मोदी की छवि: चुनाव में उम्मीदवारों की आधी जीत तो उनकी छवि से तय हो जाती है. केंन्द्र की राजनीति में आने से पहले ही नरेंद्र मोदी की छवि पूरे देश में एक सख्त नेता की थी. उत्तर भारत में उनकी लोकप्रियता लगभग गुजरात जितनी ही थी, लोग उनको सुनना पसंद करते थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने अपनी छवि को सरदार पटेल के समानांतर ला खड़ा किया है. पीएम मोदी की सख्त नेता की छवि भारत में ही नहीं बल्कि पूरे दुनिया में प्रबल हुई है. अपने पाँच वर्षों के कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ दो सर्जिकल स्ट्राइक कर के मोदी ने भारतीय जनता को यह यकीन दिलाया है कि आज का भारत कांग्रेस के 70 सालों के भारत से काफी आगे निकल चुका है। और यह यूँ ही नहीं हो पाया है. इससे पहले भी गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री हुए हैं पर नरेन्द्र दामोदर दास मोदी सबसे अलग और अलहदा है.

मौजूदा हाल में देश के लिए एक ही विकल्प है जिसे पीएम मोदी के रूप में लोग अपने सामने देख रहे हैं। बंगाल की जनता टीएमसी के शासन से त्रस्त है क्योंकि जो कत्लेआम हिन्दुओं पर कम्यूनिस्टों के शासनकाल में हुआ करता था वो अब खूलेआम हो रहा है। ओड़िशा में नवीन पटनायक के नेतृत्व में वहां की जनता भूखी मर रही है। केरल की सरकार हिन्दुओं के साथ भेदभाव कर रही है. ऐसे माहौल में मोदी के विकल्प के तौर पर ना कोई दूसरा नेता और ना ही भाजपा के मुकाबले कोई दूसरी राजनीतिक पार्टी नजर आती है ।

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