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2014 के मुकाबले 2019 में मोदी के खिलाफ विपक्ष का ज्यादा हमलावर होना, मोदी के वापस आने का संकेत है..!

11 अप्रैल से भारत में लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्योहार शुरू होने जा रहा है.विपक्ष सत्ता हासिल करने की कोशिश में लगा हुआ है और सत्तारूढ़ दल अपनी सत्ता बचाने में. यूँ तो चुनावों के मौसम में नेताओं की जुबान का फिसलना आम बात है पर जिस तरह से कांग्रेस ने 2014 में मोदी के खिलाफ जहर उगला था, वह शर्मनाक था. कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी. कांग्रेस की हार सिर्फ सत्ता विरोधी लहर के कारण नहीं हुई थी उसकी हार का एक अहम कारण यह भी था कि उसके नेता मोदी के खिलाफ आग उगल रहे थे.

इन पाँच सालों में भी कांग्रेस को अक्ल नहीं आई और इस दौरान पीएम मोदी के खिलाफ उसने और ज्यादा उग्रता दिखाई. प्रधानमंत्री कोई एक व्यक्ति नहीं होता बल्कि देश की जनता का स्वाभिमान होता है अगर आप देश के प्रधानमंत्री को गाली दे रहे हैं मतलब देश की 135 करोड़ आबादी को आप गाली दे रहे हैं.

मोदी के खिलाफ विपक्ष के नेताओं के बयान देखिए और सोचिए कि वाकई ये लोग क्या सांसद में विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में भी बैठने लायक हैं ..?

कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर ने 2014 में कहा था,” मोदी कभी पीएम नहीं बन सकते हैं, अगर वो चाय बेचना चाहें तो मैं उन्हें जगह दिला सकता हूँ” भाजपा पूर्ण बहुमत में आई और देश पर पाँच साल शासन भी किया. हद तो तब हो गई जब कांग्रेस के इस लाडले भस्मासूर ने गुजरात के विधानसभा चुनाव में मोदी को नीच व्यक्ति कहा, भाजपा वहां भी सत्ता में आई. इससे पहले 2014 के आम चुनाव में अय्यर ने पीएम मोदी को साँप,बिच्छू और जोकर तक कहा था, परिणाम सबके सामने है

अभी हाल में कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने पीएम मोदी को शिवलिंग का बिच्छू बताते हुए कहा था, “ना तो उसे हाथ से हटाया जा सकता है और ना ही चप्पल से मारा जा सकता है”

कांग्रेस के नेता ने पीएम मोदी को जलाने तक की बात कही है. क्या यह भाषा लोकतंत्र की है? मोदी के अलावे काई दूसरा पीएम होता और अगर यह देश हिंदुस्तान ना होता तो इन्हें चौराहे पर खड़ा कर तालीबान टाईप सजा मिल गई होती. राजनीति में वाद-विवाद होते रहते हैं पर कोई नेता इस स्तर की बयानबाजी करे तो जनता उसे माफ नहीं करती है. मोदी के खिलाफ विपक्ष का विवादित बयान, मोदी को और मजबूत ही बना रहा है.

कांग्रेस नेताओं की एक लंबी लिस्ट है जिसने मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया है. हैरान करने वाली बात ये है कि कांग्रेस इन नेताओं को उच्च पद पर जिम्मेवारी सौंप रही है. 2014 में मोदी के ‘बोटी-बोटी टुकड़े करने’ संबंधी बयान देने वाले मसूद अजहर को कांग्रेस ने हाल ही में यूपी का उपाध्यक्ष बनाया है.

जिस तरह से आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेसी नेता मोदी के खिलाफ बयानबाज पर उतर आए हैं उससे उनकी हताशा झलक रही है. पूरा देश मोदी के नेतृत्व को स्वीकार कर चुका है. पर कांग्रेस को लगता है कि मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल करने से उसे 2019 का ताज हासिल हो जाएगा पर ऐसा मुमकिन होता दिख नहीं रहा.

कांग्रेस अभी भी 2014 के गणित में उलझी हुई है. जब मोदी गुजरात के सीएम थे तब जनता ने उनके खिलाफ हर एक शब्द को अपने वोट में बदल दिया था. आज तो उनको पूरे देश ने अपना मान लिया है. इसलिए भाजपा के लिए 2019 का गणित उतना ही संतुलित और सटीक है जितना कि क्रिकेट में सचिन का करिश्माई स्टेट ड्राइव.

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आप ही तय करिये कौन हैं दंगेबाज़

60 साल देश की जनता को आईना दिखाने वाले, आज पीएम मोदी को आईना दिखाने की बात कर रहे हैं..!