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रवीश कुमार: निष्पक्ष पत्रकारिता का ढोल बजाने वाला इकलौता भारतीय पत्रकार..!

भारत के महान पत्रकार बन चुके या यूँ कहें कि बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे रवीश कुमार अपने ब्लाग जो कि अब वेबसाइट बन चुका है, पर लिखतें हैं- “सबसे मुश्किल है अपने बारे में लिखना”. बात भी सही है. इसलिए वो अपने बारे में कम ही लिखते हैं. हालांकि यहां रवीश को यह भी लिखना चाहिए था कि सबसे मुश्किल है अपनों के बारे में लिखना क्योंकि यह काम वो बड़ी ईमानदारी से कर रहे हैं कांग्रेस के खिलाफ ना लिखकर.

पत्रकारिता में सिखाया जाता है कि आप तटस्थ होकर लिखें, किसी के पक्ष में ना लिखें, किसी के प्रभाव में ना लिखें जो भी लिखें बड़ी ईमानदारी से लिखें और देश की आवाम के लिए लिखें. इसमें कोई संदेह नहीं कि रवीश एक क्रांतिकारी पत्रकार हैं और उनको भी लगने लगा है कि मैं बड़ा क्रांतिकारी टाईप की पत्रकारिता कर रहा हूँ. लेकिन क्रांति के भी कई पहलू होते हैं और हर पहलू का कोई ना कोई मकसद होता है. रवीश भी अपने मकसद को पूरा कर रहे हैं.

ब्रिटिश नाटककार टॉम स्टॉपर्ड ने पत्रकारिता के संदर्भ में कहा है- “अगर आपका लक्ष्य दुनिया को बदलने का है तो पत्रकारिता जल्दी में उठाया गया एक तात्कालिक हथियार है”. रवीश को देखने वालों को भी यही लगता है कि ये बंदा देश बदल देगा हालांकि मुझे तो कभी-कभी लगता है ये दुनिया बदलने वाला मटेरियल है जो बेवजह भारत में घिस रहा है.

एक ऐसा पत्रकार जिसे लगता है कि भारत में बस वही एकमात्र व्यक्ति है जो पत्रकारिता कर रहा है बाकी सब तो किसी ना किसी पार्टी की दलाली में लगे हैं. अक्सर अपने फेसबुक पोस्ट में हिन्दी चैनलों और हिन्दी अखबारों को ना देखने की अपील करने वाले रवीश जी भारत में हो रही पत्रकारिता की धज्जियां उड़ाते रहते हैं. वह दिखाना चाहते हैं कि देखो भैया असली पत्रकारिता तो मैं ही कर रहा हूँ और आपके लिए कर रहा हूँ. नहीं तो किसी पत्रकार में इतनी हिम्मत है कि वो कह दें कि आप मेरा भी चैनल ना देखें. रवीश जी की ये बात भी सही है. रवीश के अलावा कोई भी पत्रकार टीवी ना देखने की अपील नहीं करते हैं तभी तो ससुरे महान बनने से कोसों दूर हैं.

क्या आप इन ढाई महीने के लिए चैनल देखना बंद नहीं कर सकते? कर दीजिए- रवीश कुमार अगर आप अपनी नागरिकता को बचाना चाहते हैं…

Ravish Kumar यांनी वर पोस्ट केले बुधवार, २७ फेब्रुवारी, २०१९

रवीश की पत्रकारिता को आप कांग्रेस के शासन में मसलन 2004 से 2013 के बीच देखिए और उतना पीछे क्यों जाएंगे भला, 2007 से ही देख लीजिए. क्या पत्रकारिता की है इस महान शख्स ने..? तब इनको कांग्रेस की सरकार में कुछ भी ऐसा लिखने को नहीं मिलता था जो जनता के खिलाफ हो. कांग्रेस मानो जनता के लिए ही काम कर रही थी. तब रवीश कुमार के ब्लाग का विषय हुआ करता था- हिंदी की नागरिकता बनाम हिंदी की मानसिकता, सर्वे का सच, कस्बों और शहरों का रोमांस, पर्यावरण नारीवाद, मेरी दैनिक कालजयीं रचनाएं, आश्रम जाम में रोमांस पार्ट-1, तुम बहुत मोटे हो गए हो..व्वाट इज रांग विद यू, सविता भाभी डॉट कॉम पर आपका स्वागत है, अधूरी उदास नज्में-सस्ती शायरी. भाजपा की सरकार 2014 में बनने के बाद पत्रकार कुमार के ब्लाग का विषय देखें- धंधेबाज़ मीडिया मालिकों से भिड़ेगी, कोर्ट ऑफ अपील बनाएगी, राहुल कहते हैं अगले मार्च तक 20 लाख केंन्द्रीय पदों को भर देंगे, मोदी क्यों नहीं कहते ऐसा. बहुमंजिला जनता पार्टी,बीजेपी ने दो साल में बना लिए कई सौ बहुमंजिला कार्यालय, चुनाव 2019- मतदाता का हल्का होना लोकतंत्र का खोखला हो जाना है, नौकरी नहीं दी,नौकरी की ईमानदार परीक्षा भी नहीं दे सकी मोदी सरकार, किसानों को उल्लू बनाने के लिए बहुत जरूरी हैं राष्ट्रवाद के नारे. ऐसे बहुत लेख मिल जाएंगे रवीश जी के वेबसाइट पर जिसमें सिर्फ भाजपा विरोध ही दिखता हो.

अब आप तय कीजिए कि मोदी सरकार बनने से पहले रवीश कुमार क्या कर रहे थे, किस विषय पर लिख रहे थे. क्या कांग्रेस की सरकार में सबकुछ अच्छा ही चल रहा था..? रवीश कुमार की पत्रकारिता मोदी सरकार में ही क्रांतिकारी क्यों दिखती है..? रवीश कुमार पत्रकारिता को ताक पर रखकर महान बनने की राह पर निकल पड़े हैं, कुछ हद तक सफल भी हुए हैं..!

अभी हाल ही में कांग्रेस ने अपनी घोषणापत्र जारी की है और रवीश कुमार ने फेसबुक पर ऐसे उसका बखान किया है जैसे, वो अघोषित रूप से कांग्रेस के प्रवक्ता हों.

धंधेबाज़ मीडिया मालिकों से भिड़ेगी, कोर्ट ऑफ अपील बनाएगी, इलेक्टोरल बान्ड खत्म कर देगी कांग्रेसकांग्रेस का घोषणा पत्र…

Ravish Kumar यांनी वर पोस्ट केले मंगळवार, २ एप्रिल, २०१९

यह किसी से छुपा नहीं है कि रवीश के भाई ब्रजेश पांडेय कांग्रेस के नेता हैं. नेता होने तक तो ठीक है पर झट से बिहार कांग्रेस का उपाध्यक्ष बन जाना सवालिया निशान खड़ा करता है. इनके भाई सेक्स स्कैंडल में फंस चुके हैं, इस कारण इन्हें उपाध्यक्ष का पद भी गंवाना पड़ा. उनपर एक नाबालिग लड़की से बलात्कार का आरोप लगा था. धारा 376,506 और 109 के तहत उनपर मुकदमा दर्ज है. मजे की बात देखिए रवीश के भाई को जमानत दिलाने वाले वकील कपिल सिब्बल हैं. रवीश कितना भी महान बनने की कोशिश करें लेकिन सच्चाई से कैसे भागेंगे..? उस दलित लड़की के मामले में उनकी पत्रकारिता को क्या हो गया था,एक प्राइम टाइम ही कर देते. चलो प्राइम टाइम नहीं किया, 2 मिनट के लिए चैनल ही ब्लैक कर देते.

रवीश अकसर कहते रहते हैं कि भाजपा ने अपनी सोशल मीडिया की टीम खड़ी कर ली है. तो इसमें गलत क्या है..? छत्तीसगढ़ में किस तरह विनोद बर्मा के नेतुत्व में सोशल मीडिया की एक पूरी फौज कांग्रेस के लिए काम कर रही थी, क्या रवीश इस बात से अंजान थे..?

रवीश को आईना दिखाने का काम उनके ही साथी और एनडीटीवी के पूर्व पत्रकार सुशांत सिन्हा ने किया है. सुशांत ने अपने पोस्ट में रवीश को एक बिमार आदमी बताया था. और कहा था कि रवीश अपने आप को सेलिब्रिटी समझने लगे हैं. सरकार को अपनी जान का खतरा होने की चिट्ठी लिखकर वो ढ़ोंग करते हैं, दुनिया को दिखातें हैं कि अखंड भारत में एक ही पत्रकार बचा है जिसका नाम “महान रवीश कुमार” है. सुशांत ने रवीश को दो चेहरे वाला आदमी बताया जो टीवी पर तो खुद को पत्रकारिता का मसीहा बताता है और चैनल के अंदर मालिक के इशारों पर नाचता है. सिन्हा ने पक्षपात पत्रकारिता करने का भी आरोप लगाया है ‘महान कुमार’ पर.

आपको लोग ऐसे भी पहचान गए हैं रवीश जी, हे महान आत्मा अभी बहुत पत्रकारिता बची है आपमें. कांग्रेस की दलाली कर खुद को और पत्रकारिता को शर्मिंदा ना करें. आप कांग्रेस का दामन थाम लें, कसम से दोनों साथ में कमाल लगेंगे.

अंत में आपके ही ब्लाग की पंक्ति आपको समर्पित करना चाहूँगा कि “बहुत मुश्किल होता है अपनों से सवाल करना”..जिस दिन कायदे से कर लीजिएगा महान भी बन जाइएगा..!

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