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साध्वी प्रज्ञा ठाकुर: एक संन्यासिन, जिसे कांग्रेस ने जबरन हिन्दू आतंकवाद का चेहरा बना दिया..!

समंदर की एक खूबी होती है, आप कुछ भी उसकी ओर फेकें सबकुछ वो अपने अंदर समा लेती है.बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में साध्वी प्रज्ञा कहती हैं,’ भारत की संस्कृति ऐसी है कि यह सभी धर्मों के लोगों को आत्मसात कर लेती है, भारत ही ऐसा देश है जहां सब समा जाते हैं. कोई ऐसा देश बताइए जहां रहकर उस देश का विरोध करने की आजादी हो ’. साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को हाल ही में भाजपा ने भोपाल से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया है, यहां उनका मुकाबला कांग्रेस के दिग्विजय सिंह से होने वाला है.

दरअसल जिस साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को लेकर कांग्रेस इतना हल्ला मचा रही है उनके विचार में समंदर जितनी गहराई है और स्वभाव में संपूर्ण भारत, तभी तो वह समानता की बात कर रही हैं. मध्यप्रदेश के भिंड जिले के कछवाहा गांव में एक साधारण परिवार में जन्मी साध्वी प्रज्ञा इतिहास में एमए हैं. पिता चंद्रपाल सिंह पेशे से आर्युवैदिक डॉक्टर थे और संघ से जुड़े हुए थे. साध्वी का लगाव भी संघ के प्रति होता चला गया. अच्छी भाषा शैली होने के चलते वे अपने भाषण से लोगों को बांधकर रखती थीं. इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ीं. अपनी दमदार भाषण शैली के बदौलत साध्वी को जगह-जगह बोलने के लिए बुलाया जाता था.

साध्वी प्रज्ञा को पूरे देश ने तब जाना जब उनका नाम 2008 में मालेगांव धमाके में सामने आया. उस समय महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार थी. महाराष्ट्र आतंक विरोधी दस्ते ने साध्वी को पूछ-ताछ के लिए बुलाया और गिरफ्तार कर लिया. इस दौरान जेल में उनको कई तरह से प्रताड़ित किया गया, जिसको सुनाते हुए साध्वी हाल ही में रो भी पड़ी थीं.

उस समय दिग्विजय सिंह और पी चिदंबरम ने ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया था. पहली बार हिन्दू आतंकवाद के नाम पर कांग्रेस ने मुस्लिमों को लुभाने की राजनीति शुरू की. और निशाना साध्वी प्रज्ञा को बनाया. इन लोगों ने साध्वी प्रज्ञा के बहाने अपनी राजनीति खूब चमकाई. साध्वी को जेल में ही ब्रेस्ट कैंसर हो गया. बाद में एनआईए ने मकोका कानून हटाया और साध्वी को इस मामले में क्लीनचिट भी दी. नौ साल जेल में रहने के बाद साध्वी अभी जमानत पर हैं.

कांग्रेस के कुछ लोग साध्वी के भोपाल से प्रत्याशी बनने पर चुनाव आयोग का रूख कर चुके हैं.लेकिन वहां उन्हें मुँह की खानी पड़ी. साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को फिलहाल अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है,और जब खुद चुनाव आयोग को उनके चुनाव लड़ने पर एतराज नहीं है तो कांग्रेस किसलिए परेशान हो रही है..?

जिस भोपाल से प्रज्ञा ठाकुर लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं भाजपा वहां से तीस सालों से जीतती आई है. और जो हालात दिख रहे हैं उसमें इसबार जीतना भी तय है. कांग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह ने भी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को एक चुनौती माना है. और एक ट्वीट कर के प्रज्ञा ठाकुर का स्वागत किया है. लेकिन वे गफलत में हैं, प्रज्ञा ठाकुर सिर्फ उनके लिए चुनौती नहीं बल्कि उनकी हार को सुनिश्चित करेंगी.

कांग्रेस ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए ना सिर्फ एक हिन्दू की बेटी को बदनाम किया बल्कि ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल कर पूरे हिन्दू समुदाय को शर्मसार करने का काम किया है. अभी भी वो साध्वी प्रज्ञा को लेकर भाजपा पर लगातार हमले बोल रही है . कांग्रेस को जवाब देते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, ‘समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस ब्लास्ट के पीछे हिंदू आतंकवादियों का हाथ है और साधुओं को जेल में बंद कर दिया। इसलिए भाजपा ने ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे जुमले को उछालनेवाले दिग्विजय सिंह के खिलाफ साध्वी प्रज्ञा को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है।’

कांग्रेस हमेशा से भाजपा और संघ के पीछे लगी है ताकि कोई मौका मिले जो इन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया जाए. एक दफा गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा था, भाजपा और संघ आतंकी ट्रैनिंग कैंप चलाते हैं. जब बीजेपी ने संसद में उनसे जवाब मांगा तो वो मुकर गए. 2004 से लेकर 2009 तक जब देश के हर बड़े शहर में आतंकी हमले हुए तब पाकिस्तान को घेरने की जगह भारत ये साबित करने में लगा था संघ और बीजेपी आतंकी संगठन है या नहीं। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर कांग्रेस की काली सोच का शिकार हुई हैं, अगर 2014 में भाजपा की सरकार नहीं बनती तो कांग्रेस सत्ता के हर मशिनरी का इस्तेमाल कर साध्वी प्रज्ञा को फांसी पर लटका चुकी होती.

बहरहाल यह चुनावी वक्त है. एक तरफ दिग्विजय सिंह हैं तो दूसरी तरफ साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, वक्त का तकाजा देखिए जिस दिग्विजय सिंह ने सबसे ज्यादा साध्वी पर हमला बोला,उन्हें भगवा आतंकवाद का चेहरा बोला. वही दिग्विजय आज साध्वी का स्वागत कर रहे हैं, उनके खिलाफ एक शब्द बोलने के लिए तैयार नहीं हैं. दूसरी तरफ साध्वी पहले जैसे ही दिग्विजय पर हमलावर है. सियासत में दिग्विजय सिंह की यह सबसे बड़ी और शायद आखिरी हार होगी क्योंकि इसके बाद वो राजनीति नहीं कर पाएंगे. राघोपुर के अपने किले में राजा बनकर ताउम्र यही सोचेंगे कि ये “भगवा आतंकवाद” होता क्या है..?

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