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अपनी जेबें भरने से फुर्सत मिलती तब कहीं देश के बारे में सोचते है

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अब कोई लिबरल,भांड मीडिया, फ़र्ज़ी सेक्युलर नहीं चिल्लाएगा

इनकी फितरत में ही दोगलापन भरा है